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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 90, Verse 18

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 90, verse 18 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 90 · श्लोक 18

संस्कृत श्लोक

मैत्र्यादिभिर्गुणैर्युक्तं भवत्युत्तमवासनम् । भूयो जन्मविनिर्मुक्तं जीवन्मुक्तमनोऽनघ ॥ १८ ॥

हिन्दी अर्थ

आत्मज्ञ पुरुष को न तो कोई आकाशगमन से, न सिद्धि से, न तुच्छ भोगों से, न निग्रह अनुग्रह सामर्थ्य से, न अपने उत्कर्ष के ख्यापक (घोषणा करनेवाले) अभिमानों से और न आशा, मरण तथा जीवन से ही प्रयोजन है