Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 90, Verse 17
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 90, verse 17 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 90 · श्लोक 17
संस्कृत श्लोक
तस्य सत्त्वविलासस्य चित्तनाशस्य राघव ।
जीवन्मुक्तस्वभावस्य कैश्चिच्चित्ताभिधा कृता ॥ १७ ॥
हिन्दी अर्थ
यहाँ धन आदि की
अभिलाषाओं से वर्जित आत्मस्वरूपज्ञ पुरुष सबसे अतीत हो जाता है, वह अपने ही स्वरूप में सदा
सन्तुष्ट रहता है, इसलिए न कुछ चाहता है और न कुछ करता है