Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 9, Verse 52
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 9, verse 52 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 9 · श्लोक 52
संस्कृत श्लोक
संसार एव दुःखानां सीमान्त इति कथ्यते ।
तन्मध्यपतिते देहे सुखमासाद्यते कथम् ॥ ५२ ॥
हिन्दी अर्थ
सुख सुख नहीं है; किन्तु दुःख विशेषरूप ही है, इसका युक्ति से उपपादन करते है ।
संसार ही सब दुःखों की चरम सीमा है, उसके मध्य मेँ जब देह गिर गई, तब कैसे सुख प्राप्त हो
सकता है ?