Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 9, Verse 53
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 9, verse 53 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 9 · श्लोक 53
संस्कृत श्लोक
अकृत्रिममहादुःखे संसारे ये व्यवस्थिताः ।
त एतेऽन्यानि दुःखानि जानते मधुराण्यलम् ॥ ५३ ॥
हिन्दी अर्थ
स्वाभाविक महादुःख से पूर्ण इस संसार मेँ जो स्थित हैं; वे लोग जैसे तलवार के
आघात की अपेक्षा कोडे का आघात सुखकर मालूम होता है वैसे ही महादुःख की अपेक्षा कुछ अल्प
दुःख को ही सुखकर मानते हैँ । संसार मे आत्यन्तिक सुख की सत्ता है ही नहीं, यह भाव है