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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 9, Verse 50

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 9, verse 50 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 9 · श्लोक 50

संस्कृत श्लोक

इयत्ताच्छिन्नतप्तासु सुखनाम्नीषु दृष्टिषु । कास्वेतास्वनुरक्तोऽस्मि पतङ्गोऽग्निशिखास्विव ॥ ५० ॥

हिन्दी अर्थ

जैसे परिच्छिन्न एवं सन्तप्त अग्निशिखाओं में पतंगे अनुरक्त रहते हैं वैसे ही देश, काल और वस्तु की सीमा से परिच्छिन्न, आध्यात्मिक, आधिदैविक एवं आधिभौतिक तापों से संतप्त किन सुखनाम की दृष्टियों में मे अनुरक्त हुआ हूँ ?