Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 9, Verse 49
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 9, verse 49 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 9 · श्लोक 49
संस्कृत श्लोक
काकतालीययोगेन संपन्नायां जगत्स्थितौ ।
धूर्तेन कल्पिता व्यर्थं हेयोपादेयभावना ॥ ४९ ॥
हिन्दी अर्थ
काकतालीय न्याय से अकस्मात अविचार से सम्पन्न इस जगत स्थिति में भोग लम्पट इस मन ने व्यर्थ
ही हेय और उपादेय की कल्पना की है