Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 86, Verse 24
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 86, verse 24 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 86 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
अपुनर्भवनायैव यत्र चिन्तान्तमागता ।
मूढता च सुदूरस्था तत्रासाववसत्सदा ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
प्राप्त मूर्ति वीतहव्य तथा आकाशगामी पिंगल दोनों ने
परस्पर प्रणाम किया | तदनन्तर तेज के निधि वे दोनों अपने अपने कार्यो में ही तत्पर हो गये