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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 86, Verse 23

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 86, verse 23 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 86 · श्लोक 23

संस्कृत श्लोक

एवंविधेन भगवान्विचारेण महातपाः । सोऽतिष्ठन्मुनिशार्दूलो बहून्वर्षगणानिह ॥ २३ ॥

हिन्दी अर्थ

तदनन्तर मुनि वीतहव्य-सम्बन्धी पुर्यष्टक शरीर पिंगल के शरीर से निकलकर अपने शरीर मेँ उस प्रकार प्रविष्ट हुआ, जिस प्रकार आकाशतल में चारों ओर परिभ्रमण करनेवाले पक्षी अपने घोसले में प्रवेश करता है