Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 86, Verse 25
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 86, verse 25 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 86 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
यथाभूतपदार्थौघदर्शनोत्थमनर्थकम् ।
ध्यानाश्वासनमालम्ब्य सोऽवसत्सुखगः सदा ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
पिंगल आकाश की ओर चले गये ओर मुनि वीतहव्य निर्मल सरोवर की ओर, जो कुमुदरूपी ताराओं
से युक्त तथा बाल सूर्य के राग से रंजित जल से युक्त था, स्नानार्थ चले गये