Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 83, Verse 74
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 83, verse 74 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 83 · श्लोक 74
इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।
हिन्दी अर्थ
अथवा आत्मज्ञान से तुम्हारे जैसे दुःखप्रद दृश्यों का उच्छेद हो जाने पर दुःखशून्य
निरतिशय आनन्दात्ममात्र का परिशेष रह जाता है। यदि इतने से तुम सन्तुष्ट रह सकते हो, तो एकाग्र
ध्यान से दीर्घकाल तक विच्छिन्न समाधि से युक्त होकर आत्मदर्शी हो जाओ