Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 83, Verse 75
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 83, verse 75 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 83 · श्लोक 75
इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।
हिन्दी अर्थ
तुमको समाधि मेही सुख है, न कि संकल्योन्मुखता में, क्योकि शिला के ऊपर गिरा हुआ झरने
का जल जैसे शिला से टकराकर अनेक तरह विभक्त हो जाता है, वैसे ही संकल्पों के द्वारा देह आदि के
ऊपर गिरी हुई संवित् इन्द्रियों के दरवाजों से अनेक तरह विभक्त होकर विशीर्ण-सी हो जाती है, अतः
वही दुःख है, ऐसा कहते है ।
पाषाण के सदृश जड़ मन, देह, इन्द्रिय आदि मे संकल्पोन्मुखता को तुम दुःखप्रद संवित् की च्युति
समझो