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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 83, Verse 35

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 83, verse 35 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 83 · श्लोक 35

संस्कृत श्लोक

तवानेनाभिपीनत्वमभूद्दुःखैककारणम् । मोहसंकल्पमात्रेण बालवेतालवद्भवेत् ॥ ३५ ॥

हिन्दी अर्थ

जब ऐसी स्थिति है, तव मैं (चित्त) प्रत्यकृ-चेतनस्वरूप ही क्यो न कहा जाऊँ ? ऐसी आशंका होने पर तव तो तुम्हारी निर्विकल्प ही स्थिति युक्तियुक्त है, दुःखप्रद कर्तृत्व-भोक्तत्व भावअभावरूपा विकल्पमयी स्थिति युक्त नहीं है, ऐसा कहते है । हे चित्त, “प्रत्यक्चेतनस्वरूप ही मैं हूँ” इस प्रकार तुम अपने को प्रत्यक्‌ चेतनरूप मानते हो, तो तुम्हारा स्वरूप आत्मा ही हुआ, ऐसी स्थिति में दुःखप्रद भावअभावमयी तुम्हारी सत्ता कैसी ?