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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 83, Verse 34

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 83, verse 34 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 83 · श्लोक 34

संस्कृत श्लोक

विचारेणोपशान्तं त्वमालोकेन तमो यथा । एतावन्तं सखे कालं बभूवाल्पविवेकिता ॥ ३४ ॥

हिन्दी अर्थ

जो जडस्वरूप हे, उसका अस्तित्व हे ही नहीं । जैसे जपा कुसुम की लालिमा से स्फटिक में लालिमा दिखाई पडती है, वैसे ही परमात्मा के अस्तित्व से जड में अस्तित्व दिखाई पडता हे । स्वयं तो असत्ता से समन्वित है, ज्ञातापन, कतपिन,भोक्तापन ओर पूर्वापर अनुसन्धान का कर्तापन ये सब चैतन्य के बिना नहीं हो सकते