Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 83, Verse 29

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 83, verse 29 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 83 · श्लोक 29

संस्कृत श्लोक

तमेव भावयाभावं सुखत्यागो हि मूढता । यदि त्वस्ति भवेत्सत्यमन्तर्भावितचेतनम् ॥ २९ ॥

हिन्दी अर्थ

हे चित्त, अहंकार का यानी अभिमानरूप तुम्हारे परिणाम का जब आविर्भाव होता है, तब “कार्य- कारण संघातरूप में ही हूँ” इस प्रकार का जो तुम अभिमान करते हो, उसे छोड दो | हे मूर्ख, तुम कुछ भी नहीं हो, इसलिए क्यों व्यर्थ चंचल हो उठते हो