Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 81, Verse 19
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 81, verse 19 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 81 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
विगतमानमदा मुदिताशयाः शरदुपोढशशांकसमत्विषः ।
प्रकृतसंव्यवहारविहारिणस्त्विह सुखं विहरन्ति महाधियः ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
हे दुष्ट चित्त, तुम्हारा
गर्जन मेरे लिए तनिक भी हर्ष ओर विषाद के लिए नहीं है, एेन्द्रजालिक माया से जनित मन के अनेक
तरह की विषयदर्शनाकार चेष्टाओं की नाई तुम अनेकविध विषयाकार वृत्तियों मे क्यों निरर्थक दग्ध हो
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