Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 81, Verse 20
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 81, verse 20 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 81 · श्लोक 20
इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।
हिन्दी अर्थ
हे चित्त, तुम रहो चाहे जाओ, तुम न तो मेरे हो ओर न तुम जीते हो । अपने मिथ्यास्वभाव
से तुम सदा मृतक (निरात्मक) ही हो और विचार से उस प्रकार स्मृत तुम अत्यन्त असत् हो