Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 80, Verse 9
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 80, verse 9 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 80 · श्लोक 9
संस्कृत श्लोक
कल्पाम्भसीव शफरी चित्ते स्फुरणधर्मिणि ।
स्वयं स्फुरत्यहंकारस्त्वमयं प्रोत्थितः कुतः ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामजी, यह सब आत्मस्वरूप ही हे, कोन भाव
ओर अभाव अलग कर निरूपित हो सकते हैं ? वे कहाँ रह सकते हैं ? बन्ध और मोक्ष की कल्पना कहाँ
हो सकती ? आत्मा को छोड कर ऐसी कौन वस्तु हे ? जिसके विषय में मूढ लोग शोक करते हैं