Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 80, Verse 10
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 80, verse 10 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 80 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
आलोकरूपयोर्नित्यं जडयोः स्फुरतोर्मिथः ।
आधाराधेययोश्चित्तं व्यर्थमाकुलता तव ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
आत्मा से भिन्न न तो चेत्य है और न चित्त है, दृश्य रूप यह सब ब्रह्म ही शोभित हो रहा है, समस्त
ब्रह्माण्ड अद्वितीय चिदाकाशस्वरूप ही है, अतः क्या मोक्ष है और किसको बन्ध है ?