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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 80, Verse 8

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 80, verse 8 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 80 · श्लोक 8

संस्कृत श्लोक

सलिलस्पन्दवद्दृष्टिः पिच्छिकेवाम्बरोत्थिता । सुजातिबन्धा स्फुरति तव चित्त किमागतम् ॥ ८ ॥

हिन्दी अर्थ

सम्यक्‌ ज्ञान का निचोड स्वरूप कहते है । इस तीनों लोको में यथार्थ आत्मदर्शिता इतनी ही है कि यह सब जगत्‌ आत्मस्वरूप ही हे, ऐसा निश्चय करके पुरुष पूर्णता को प्राप्त करे