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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 8, Verses 7–8

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 8, verses 7–8 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 8 · श्लोक 7,8

संस्कृत श्लोक

अथ शुश्राव कस्मिंश्चित्तमालवनगुल्मके । सिद्धानामप्रदृश्यानां स्वप्रसङ्गादुदाहृताः ॥ ७ ॥ विविक्तवासिनां नित्यं शैलकन्दरचारिणाम् । इमाः कमलपत्राक्ष गीता गीतात्मभावनाः ॥ ८ ॥

हिन्दी अर्थ

हे कमलनयन, तदनन्तर उन्होने किसी तमालवृक्ष की झाड़ी में छिपे हुए, सदा पर्वतो की गुफाओं मेँ विचरण करनेवाले, एकान्त में निवास करनेवालो सिद्धो की अपने अनुग्रह के लिए कही गई तथा श्रुति, स्मृति, पुराण ओर इतिहासो से गीत आत्मतत्व की श्रवण मात्र से साक्षात्‌ भावना करानेवाली निम्नलिखित गीताएँ सुनी