Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 8, Verse 14
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 8, verse 14 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 8 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
अन्ये ऊचुः ।
संत्यज्य हृद्गुहेशानं देवमन्यं प्रयान्ति ये ।
ते रत्नमभिवाञ्छन्ति त्यक्तहस्तस्थकौस्तुभाः ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
औरों ने कहा : हृदय गुहा में स्थित दैदीप्यमान ईश्वर का त्याग कर जो लोग अन्य के पास जाते हैं,
वे हाथ में आये कौस्तुभमणि का त्याग कर अन्य रत्नों की चाह करते हे