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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 8, Verse 15

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 8, verse 15 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 8 · श्लोक 15

संस्कृत श्लोक

अन्ये ऊचुः । सर्वाशाः किल संत्यज्य फलमेतदवाप्यते । येनाशाविषवल्लीनां मूलमाला विलूयते ॥ १५ ॥

हिन्दी अर्थ

औरों ने कहा : सम्पूर्ण आशाओं का त्याग कर हृदय में स्थित ज्ञान का फलरूप यह ब्रह्म प्राप्त होता हे, जिसके लाभ से वासनाजालों से जटिल हृदयग्रन्थि कट जाती है, जो विषवल्लियों की मूल परम्परा है