Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 79, Verse 15
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 79, verse 15 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 79 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
द्वैताद्वेतसमुद्भूतैर्जरामरणविभ्रमैः ।
स्फुरत्यात्मभिरात्मैव चित्रैरम्ब्विव वीचिभिः ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
चित्त का परिस्पद प्राण परिस्पन्द के अधीन है, यह बात बड़े-बड़े महर्षि, जो “प्राणबन्धनं हि सोम्य
मनः" इत्यादि वेदों का रहस्य जानते हैं, कहते हँ । अतः प्राण का निरोध करने पर मन अवश्य उपशान्त
यानी निरुद्ध हो जाता हे