Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 79, Verse 16
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 79, verse 16 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 79 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
शुद्धमात्मानमालिङ्ग्य नित्यमन्तस्थया धिया ।
यः स्थितस्तं क आत्मेहं भोगा बन्धयितुं क्षमाः ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
भले ही ऐसा हो, उससे प्रकृत में क्या हुआ, इस पर कहते हैँ ।
मन के स्पन्दन की विश्रान्ति हो जाने पर यह संसार उस प्रकार विलीन हो जाता है, जिस प्रकार
सूर्य के प्रकाशरूप स्पन्दन की विश्रान्ति हो जाने पर व्यवहार विलीन हो जाता है