Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 79, Verse 14
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 79, verse 14 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 79 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
परं व्योमेदमखिलं जगत्स्थावरजङ्गमम् ।
सुखदुःखक्रमः कुत्र विज्वरो भव राघव ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
प्राण के स्पन्दन से चित्त का
स्पन्दन होता है यानी चिदाभास से व्याप्त वृत्तिविशेष, उत्पन्न होता है और चित्त के स्पन्दन से ही
संवित् यानी तत् तत् विषयाकार प्रथन उस प्रकार उत्पन्न होता हैं, जिस प्रकार जल के स्पन्दन से चक्र
की तरह वर्तुल आकार की रचना करनेवाली उर्मिर्योँ उत्पन्न होती हैं