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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 78, Verse 36

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 78, verse 36 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 78 · श्लोक 36

संस्कृत श्लोक

तत्तु प्रधानं हृदयं तत्रेदं समवस्थितम् । तदादर्शः पदार्थानां तत्कोशः सर्वसंपदाम् ॥ ३६ ॥

हिन्दी अर्थ

प्रातिभासिक जगत्‌ की दुष्टिरूपी सृष्टि में सक्षम नर यानी 'मैं ही अपनी आत्मा में जगद्रूप माया का सर्जन करता हूँ इस प्रकार अनुभव कर रहे जीवन्मुक्त महापुरुष न निरन्तर प्राणियों से जनित असीम भाव एवं अभावों से नष्ट ओर खिन्न होते हैं तथा न उत्पन्न ओर प्रसन्न ही होते हैं