Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 77, Verse 1
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 77, verse 1 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 77 · श्लोक 1
संस्कृत श्लोक
श्रीराम उवाच ।
समासेन मुने भूयो दृष्टतत्त्वचमत्कृतेः ।
कथयोदारवृत्तान्तं कस्ते वचसि तृप्यति ॥ १ ॥
हिन्दी अर्थ
महाराज वसिष्ठजी ने कहा : हे राघव, ये समस्त जगत् अविज्ञात ब्रह्म से ही आविर्भूत होते हैं,
आत्मा ओर अनात्मा के अविवेक से वे स्थिरता को प्राप्त होते हैं और विवेक से प्रशान्त (विनष्ट)
ही हो जाते हैं
सर्ग सन्दर्भ
पचहत्तरवाँ सर्ग समाप्त छिहत्तरवाँ सर्ग संसाररूपी जलधि, स्त्रीरूपी तरंग, उसके तरण का उपाय और तरने के अनन्तर सुखपूर्वक विचरण का वर्णन |