Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 77, Verse 2
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 77, verse 2 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 77 · श्लोक 2
संस्कृत श्लोक
श्रीवसिष्ठ उवाच ।
जीवन्मुक्तस्य बहुधा कथितं लक्षणं मया ।
भूयोऽपि त्वं महाबाहो कथ्यमानमिदं श्रृणु ॥ २ ॥
हिन्दी अर्थ
ब्रह्मरूपीसमुद्र मे जगत्-समूहरूपी जल के तरगों की गिनती कौन कर सकता
है ? क्या कोई सूर्य किरणों से सम्बन्ध रखनेवाले त्रसरेणुओं की गिनती कर सकता है ?