Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 75, Verse 55
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 75, verse 55 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 75 · श्लोक 55
संस्कृत श्लोक
सुमहद्धैर्यमालम्ब्य मनसा व्यवसायिना ।
विचारयात्मनात्मानमात्मनश्चिरसिद्धये ।
वितताध्यवसायस्य जगद्भवतिगोष्पदम् ॥ ५५ ॥
हिन्दी अर्थ
हे राघव, इन पदार्थों के समूहों
का जो यथार्थ आत्मभूत स्वरूप है, उसको जानने से ही पुरुष बुद्धि के परम विश्रान्तिस्वरूप नैराश्य को
प्राप्त होता है