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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 75, Verse 54

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 75, verse 54 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 75 · श्लोक 54

संस्कृत श्लोक

न त्वनध्यवसायस्य दुःखाय विपुलात्मने । आत्मा परवशः कार्यो मोहमाश्रित्य केवलम् ॥ ५४ ॥

हिन्दी अर्थ

आपका वैसा कहना यद्यपि उचित है, तथापि आशारूपी दुःखकी निवृत्ति किस प्रकार से होगी ? तो इस पर कहते हैं। श्रीरामजी, यह सम्पूर्ण जगत्‌ आत्मस्वरूप ही है, यहाँ विविधरूपता है ही नहीं, जगत्‌ को अद्वितीय परमात्मस्वरूप जानकर धीर महात्मा तनिक भी खिन्न नहीं होते