Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 75, Verse 56
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 75, verse 56 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 75 · श्लोक 56
संस्कृत श्लोक
यदुपगतः सुगतः पदं प्रधानं यदपगतोऽध्रुवतां नृपश्च कश्चित् ।
यदुपगताः पदमुत्तमं महान्तः प्रयतनकल्पतरोर्महाफलं तत् ॥ ५६ ॥
हिन्दी अर्थ
समस्त पदार्थो का यथार्थ स्वरूप किस प्रकार का है ? इसे कहते हैं।
उत्पत्ति, विनाश और विकल्पों से विनिर्मुक्त, आदि और अन्त मे स्थित जो स्वरूप है वही पदार्थों
का स्वरूप है, ऐसी भावना कर आप अपनी स्थिति कीजिये