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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 73, Verse 46

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 73, verse 46 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 73 · श्लोक 46

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

यह आपने कैसे निश्चय किया कि आत्मा ही उस प्रकार से अवस्थित है ? इस पर कहते हैं। हे श्रीरामजी, चूँकि वस्तुओं की जो-जो सत्ता है, वह आत्मा के प्रकाश के सिवा दूसरी वस्तु नहीं है, इसलिए जो कोई यह कहे कि मैं आत्मप्रकाश से व्यतिरिक्त हूँ, तो उसका वैसा कहना उन्मत्त की नाई बकवासमात्र ही है, यह आप जानिये