Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 73, Verse 45
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 73, verse 45 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 73 · श्लोक 45
इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।
हिन्दी अर्थ
तब क्यो भूमि आदिभूत दिखाई देते हैं ? इस पर कहते हैं।
हे श्रीरामजी, यह आत्मा ही अपने स्वरूप में काठिन्य, द्रवता, स्पन्द, आकाशरूपी अवकाश और
प्रकाश के अवलोकनों से क्रमश: पृथ्वी, जल, वायु, आकाश और तेजरूप जगत्-भावों में विद्यमान है
यानी नट के समान अवस्थित है, यह भाव है