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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 73, Verse 47

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 73, verse 47 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 73 · श्लोक 47

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

जो कुछ पहले कहा, उस सबको एकत्र कर उपसंहार करते हैं। श्रीरामजी, समस्त काल और असीम कालक्रमों के बीच में प्रविष्ट अनेक जगत्‌ तथा उन अनेक जगतां में जीव के अनैकविध संसार यह सब एक आत्मा ही है, इसको छोड़ और कोई दूसरी कला की गणना है ही नहीं, अतः हे महानुभाव, आप पहले इस प्रकार की बुद्धि से युक्त होकर उक्त बुद्धि से यानी तत्त्वदर्शन से इस संसार से अपना छुटकारा पा जाइये