Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 73, Verse 35
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 73, verse 35 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 73 · श्लोक 35
संस्कृत श्लोक
न मोक्षो नभसः पृष्ठे न पाताले न भूतले ।
मोक्षो हि चेतो विमलं सम्यग्ज्ञानविबोधितम् ॥ ३५ ॥
हिन्दी अर्थ
रम्य विषयों का और इन्द्रियवृत्तियों का परस्पर सम्बन्ध होने पर उत्पन्न होनेवाला जो सुख है, वह
आत्मस्वरूप ही है, ऐसा महात्मा लोग कहते हैं।
वह सुख विषयसंग से युक्त होने पर संसार कहलाता है और विषय संग से विनिर्मुक्त होने पर
मुक्ति कहलाता है