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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 73, Verse 34

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 73, verse 34 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 73 · श्लोक 34

संस्कृत श्लोक

द्वे एव कलने त्यक्त्वा मोक्षबन्धात्मिके यथा । विदुषा व्यवहर्तव्यं यन्त्रणेवात्ममौनिना ॥ ३४ ॥

हिन्दी अर्थ

विषय ओर इन्द्रियों का सम्बन्ध होने पर सर्वोत्तम जो सुखानुभूति होती है, वह अज्ञानी पुरुष को संसार प्रदान करती है ओर तत्त्वज्ञ ज्ञानी पुरुष को सर्वोत्तम सदा उदयस्वरूप मोक्ष प्रदान करती है यानी विषयाकार वृत्ति से आस्वादित सुख विषयों मेँ राग आदि दोषों का उद्भावन कर संसार देता है और विषयों का विवेककर अखण्ड अद्वितीय आत्मभावसे गृहीत सुख मोक्ष देता हे, यह भाव हे