Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 73, Verse 32
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 73, verse 32 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 73 · श्लोक 32
संस्कृत श्लोक
एवंगुणविशिष्टोऽयमात्मा सर्वस्य राघव ।
अविचारवशान्मूढो लोकोऽयं परिरोदिति ॥ ३२ ॥
हिन्दी अर्थ
हे सुन्दरनेत्रवाले श्रीरामजी, मिथ्या दर्शनरूपी भरम को
छोडकर आप यथार्थ वस्तु का अवगम करिये | जब मनुष्य यथार्थ ज्ञान से युक्त होकर प्रौढ बन जाता
है, तब इस संसारमें कहीं पर भी वह मोह को प्राप्त नहीं होता