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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 72, Verse 47

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 72, verse 47 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 72 · श्लोक 47

संस्कृत श्लोक

एको जगन्ति सकलानि समस्तकालकल्पक्रमान्तरगतानि गतागतानि । आत्मैव नेतरकलाकलनास्ति काचिदित्थंमतिर्भव तयातिगतो महात्मन् ॥ ४७ ॥

हिन्दी अर्थ

श्रीरामजी ने कहा : मान्यतम हे भगवान्‌, चित्त के ये नाम किस योग से यानी किस व्युत्पत्ति से योगरूढ़ि को प्राप्त हुए हैं, हे ब्रह्मन्‌, उसी को मुझसे इसलिए कहिए कि जिससे आपके द्वारा प्रतिपादित पूर्वोक्त विचारों की सिद्धि हो जाय