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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 72, Verse 46

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 72, verse 46 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 72 · श्लोक 46

संस्कृत श्लोक

आत्मैव सर्वं सर्वेषु भूवार्यनिलखाग्निषु । सत्तैवास्ति न वस्तूनां या या राम चिता विना । व्यतिरिक्तं ततोऽस्मीति विद्धिप्रोन्मत्तजल्पितम् ॥ ४६ ॥

हिन्दी अर्थ

इसी चित्त के कारण से संसार का कारणभूत अज्ञान प्राप्त हुआ है, अत: अधिकारी जन को स्वयं उसके विषय में विचार करना चाहिए अथवा इससे संसार के कारणभूत चित्त के विषय में विचार करना चाहिए, जिसके कि जीव, अन्तःकरण, चित्त, मन आदि अनेक नाम हैं