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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 72, Verse 48

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 72, verse 48 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 72 · श्लोक 48

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

उसमें पहले रूढि और योगांश से जीव नाम का निर्वचन करने के लिए महाराज वसिष्ठ जी भूमिका बाँधते हैं। वसिष्ठजी ने कहा : हे रामजी, जैसे तरंगों के समूह केवल जल से ही उत्पन्न होते हैं, वैसे ही ये समस्त पदार्थ, जो आत्मतत्त्व के साथ ऐक्याध्यास होने के कारण आत्मतत्त्वरूप प्रतीत होते हैं, केवल चित्त से (समष्टि चित्त से) ही सदा उत्पन्न होते हैं