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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 72, Verse 23

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 72, verse 23 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 72 · श्लोक 23

संस्कृत श्लोक

आत्मैव स्पन्दते विश्वं वस्तुजातैरिवोदितम् । तरङ्गकणकल्लोलैरनन्ताम्ब्वम्बुधाविव ॥ २३ ॥

हिन्दी अर्थ

तब अध्यस्त ही सम्बन्ध हो ? इस पर कहते है । जैसे सूर्य की किरणों मे प्रतीत हुआ समुद्र विभ्रम किरणों के यथार्थ साक्षात्कार से विनष्ट हो जाता है, वैसे ही अधिष्ठान आत्मतत्त्व के साक्षात्कार से यह देह ओर आत्मा का परस्पर हुआ सम्बन्ध विभ्रम भी विनष्ट हो जाता है