Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 72, Verse 24
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 72, verse 24 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 72 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
एवंप्रायमहाबोधा वीतरागा गतैनसः ।
जीवन्मुक्ताश्चरन्तीह महासत्त्वपदं गताः ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
शुद्धमपापविद्धम्" (आत्मा निर्मल ओर समस्त पापों से विवर्जित है) इत्यादि श्रुतियो से निश्चित
स्वाभाविक विशुद्धि के साथ विरोध होने से भी आत्मा अशुद्ध देह आदि के साथ तनिक भी स्पर्श नहीं
करता, ऐसा कहते हैँ ।
चिदात्मा समस्त मलों से विवर्जित, अविनाशी, स्वप्रकाश एवं समस्त विकारों से रहित है और देह
विनाशी एवं समस्त मलों से परिपूर्ण है, ऐसी स्थिति में विशुद्धि आदि गुणों से युक्त आत्मा अविशुद्धि
आदि से उपप्लुत शरीर के साथ कैसे सम्बद्ध हो सकता है ?