Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 72, Verse 21
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 72, verse 21 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 72 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
पृथग्भूतगणं दृष्ट्वा देहातीतो भवत्यजः ।
परं प्रकाशमायाति सूर्यकान्तिरिवाहनि ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
यदि शंका हो कि देह और आत्मा का संयोग या तादात्म्य सम्बन्ध भले ही न हो, परन्तु समवाय तो
हो सकता है, तो इस पर कहते है ।
जो कि समवाय सम्बंध अयुतसिद्ध पदार्थो का हे, वह इन जड देह ओर चेतन आत्मा का कैसे
अनुभूत हो सकता हे, अर्थात् उनका समवाय सम्बन्ध है, यह अनुभव नहीं हो सकता