Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 72, Verse 20
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 72, verse 20 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 72 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
ततो विश्लिष्टभूतौघो देहं संप्रति पश्यति ।
वायुस्कन्धगतो जन्तुर्वसुधामण्डलं यथा ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामजी, जैसे सदा-सर्वदा परस्पर विरुद्ध रहनेवाले शीत
और उष्ण का एक दूसरे से सम्बन्ध नहीं होता, वैसे ही चैतन्य ओर जाड्य धर्मो से परस्पर अत्यन्त
विरुद्ध देह ओर आत्मा का भी (एक दूसरे से) कभी सम्बन्ध नहीं हो सकता