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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 72, Verse 19

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 72, verse 19 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 72 · श्लोक 19

संस्कृत श्लोक

प्रबोधाच्चेत्यतां त्यक्त्वा व्रजत्यात्मात्मतां स्वयम् । स्वस्पन्दवशतो वारि त्यक्त्वाच्छत्वमिवाच्छतां ॥ १९ ॥

हिन्दी अर्थ

जैसे छाया और धूप विस्तार का तथा प्रकाश और अन्धकार का परस्पर सम्बन्ध नहीं होता, वैसे ही शरीर और आत्मा का भी परस्पर सम्बन्ध नहीं होता