Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 72, Verse 18
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 72, verse 18 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 72 · श्लोक 18
संस्कृत श्लोक
आत्मा चित्ततया देहभूतान्याश्लेषयन्स्थितः ।
तृणान्यावृत्तवृत्तान्तकलनोत्सिक्तमब्धिवत् ॥ १८ ॥
हिन्दी अर्थ
कर्थचित् भेद मान लिया जाय और देह आदि भी सत्य मान लिये जाय, तो भी उनके साथ आत्मा
का सम्बन्ध हो ही नहीं सकता, यों प्रौढि बतलाते हुए कहते हैं।
हे शत्ुनिषूदन, भेद का अंगीकार करने पर भी और देह आदि को सत्य मान लेने पर भी व्यापक
आत्मा का उनके साथ सम्बन्ध नहीं हो सकता, यह आपसे मैं कहता हूँ