Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 71, Verse 7

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 71, verse 7 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 71 · श्लोक 7

संस्कृत श्लोक

शरीरसंनिवेशस्य क्षये स्थैर्ये च संविदः । मा गृहाण भ्रमो ह्येष शरीरमिति जृम्भते ॥ ७ ॥

हिन्दी अर्थ

जैसे जल रेखा कमल को रंजित नहीं कर सकती, वैसे ही जिसने जीव और ईश्वर के स्वरूप को भलीर्भोति जान लिया है अतएव जो परम निरतिशयानन्दरूप परम अभ्युदय को प्राप्त हुआ है, ऐसे तत्त्ववित्‌ के चित्त को संसारिक दृष्टि रंजित नहीं कर सकती