Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 71, Verse 6
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 71, verse 6 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 71 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
सुषुप्तावस्थया राम भव संव्यवहारवान् ।
चित्रेन्दोरिव ते न स्तः क्षयोद्वेगावरिन्दम ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
विक्षोभ के प्रतीत होने पर भी वस्तुतः तत्ववित् मे क्षोभ नहीं रहता, इस विषय मे दृष्टान्त कहते हैं ।
जैसे रजक जपाकुसुम (फूल) आदि उपाधियों से चिकना स्फटिक मणि (वास्तव मेँ) रंग से युक्त
नहीं होता, वैसे ही आत्मस्वरूप को प्राप्त हुआ तत्त्ववित् का अन्तःकरण (उपाधियों से) सुख-दुःख से
रंग से युक्त नहीं होता