Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 71, Verse 11
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 71, verse 11 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 71 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
मनस्तवात्मसंपन्नं नाधः समनुधावति ।
योगमन्त्रतपःसिद्धः पुरुषः खादिवावनिम् ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
स्वसंसक्तिरूपी दृष्टि में अभ्यास क्रम से परम प्रौढता को प्राप्त हुआ जीव पवित्र सूर्यभाव को (परम
पावनस्वप्रकाश आत्मस्वरूपता को) ऐसे प्राप्त होता है, जैसे क्रमशः अपनी कला के क्षय से जलमय
मण्डल में पड़ा हुआ सूर्य प्रतिबिम्बस्वरूप चन्द्रमा अमावस्या में सूर्यरूपता को प्राप्त होता है