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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 71, Verse 10

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 71, verse 10 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 71 · श्लोक 10

संस्कृत श्लोक

ईप्सितानीप्सितं त्यक्त्वा शीतलालोकशोभया । अन्धकारात्तथाम्भोदान्मुक्तं खमिव शोभते ॥ १० ॥

हिन्दी अर्थ

हे श्रीरामचन्द्रजी, पूर्वोक्त स्वरूपवाली असंसक्त दुष्ट मेँ परिणत, प्रियाप्रिय आदि द्वन्द्वों से शून्य तथा नित्य कभी अस्त न होनेवाले उदय से युक्त जीव जाग्रत अवस्था में ही सुषुप्ति में अवस्थित हो जाता है